अंडर वर्ल्ड डॉन बाबा सावंत की मौत कोई मामूली घटना नहीं थी। हंसिका सावंत बहुत अच्छे से जानती थी कि वह खबर बाहर आते ही उसके दुश्मनों की लाईन लग जायेगी। ऊपर से वह नशा मुक्त मुंबई का एक ऐसा सपना देख रही थी जिसके पूरा होने का यकीन तो खुद उसे भी नहीं था। मगर ये उसकी जिद थी कि न ड्रग्स बेचेगी ना ही किसी और को बेचने देगी। सही मायने में कहा जाये तो सौतेली बेटी की मोहब्बत में अंधी वह औरत अपने हाथों अपनी कब्र खोद रही थी और मजे की बात ये थी कि उसका उसे पूरा पूरा एहसास भी था। अब बस देखना ये था कि चौतरफा बुरे हालातों में घिरी हंसिका सावंत कब तक सर्वाईव कर पाती थी।
‘अंडर वर्ल्ड’ सिरीज़ का दूसरा उपन्यास


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