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एक रात… एक गांव… और दो औरतों का कत्ल।
मोहिनी महतो को जहर देकर मारा गया था, जबकि सुजाता ठाकुर की हत्या गला घोंटकर की गयी थी। मरने वाली दोनों महिलाओं के बीच कोई समानता नजर नहीं आती थी। दोनों की जिंदगी अलग थी, सामाजिक हैसियत अलग थी। एक प्रतिष्ठित परिवार की चरित्रवान युवती थी, तो दूसरी मामूली घर की बदनाम औरत।
संदिग्ध कई थे, लेकिन अंजना दत्ता का शक बार-बार सुजाता ठाकुर के पति पर जाकर ठहर जाता था। जबकि उसे कातिल साबित करना असंभव था क्योंकि कत्ल के वक्त वह अपनी पत्नी से सत्रह सौ किलोमीटर दूर मुंबई में मौजूद था और उस बात के अकाट्य सबूत मौजूद थे।
सुजाता की हत्या ऐसे घर में हुई थी जो अंदर से बंद था, और अंजना दत्ता पूरी तरह आश्वस्त थी कि बाहर खड़े होकर किसी भी तरह भीतर से उसका कुंडा नहीं बंद किया जा सकता था।
अभी जांच पड़ताल चल ही रही थी कि तभी गांव के एक युवक ने आत्महत्या कर ली, और पीछे छोड़े गये सुसाइड नोट में उसने न केवल खुद को कातिल बताया, बल्कि विस्तार से यह भी लिखा कि उसने कत्ल कैसे और क्यों किया। मगर उस सुसाईड नोट ने कहानी को सुलझाने की बजाये पहले से कहीं ज्यादा उलझाकर रख दिया।
मशहूर अपराध कथा लेखक संतोष पाठक की कलम से निकली कत्ल, धोखे और रहस्यों से भरी एक ऐसी सनसनीखेज कहानी, जिसका अंत आपको स्तब्ध कर देगा।
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