सात अगस्त की रात अडानी परिवार के लिए कयामत की रात थी। उसके घर पर छह गोलियां चलाई गयीं, जिससे दो लोगों की मौत हो गयी और दो घायल हो गये। हत्यारे को उसी रात गिरफ्तार कर के मर्डर वैपन बरामद कर लिया गया, जिसपर उसकी उंगलियों के निशान तक मौजूद थे। पुलिस की निगाहों में वह ओपन एंड शट केस था मगर वंश वशिष्ठ को उसमें ‘पर्दाफाश’ के लिए स्कोप नजर आ रहा था। इसलिए क्योंकि हमलावर घोषित पागल था, वह योजना बनाकर वैसी किसी घटना को अंजाम नहीं दे सकता था। जबकि योजना बनाई बराबर गयी थी क्योंकि कत्ल से दो रोज पहले ही उस गन को चोरी कर लिया गया था, और खास बात ये थी कि गन के मालिक के साथ कबीर अडानी का महीना भर पहले ही झगड़ा होकर हटा था। ऐसे में सबसे अहम सवाल ये था कि क्या रिवाल्वर चोरी की रिपोर्ट झूठी थी? क्या वह इसलिए दर्ज करवाई गयी ताकि दो दिन बाद जब उसी गन से कबीर के घर पर हमला होता तो किसी का ध्यान गन के मालिक की तरफ नहीं जाने पाता?
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