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मशहूर उद्योगपति स्वराज मलिक। एक ऐसा नाम, जो कभी पैसा और सफलता का पर्याय हुआ करता था। मगर महज़ चालीस की उम्र में उसने सब कुछ छोड़ दिया। कारोबार, मीटिंग्स, डील्स, सबको पीछे छोड़कर वह एक नई दुनिया में कदम रख चुका था। ऐसी दुनिया, जहाँ रोमांच ही उसका असली बिज़नेस था।
और उस रोमांच का सबसे बड़ा मंच था उसका छतरपुर स्थित फार्महाउस, ‘मलिक मेंशन’। वहाँ होने वाली पार्टियाँ आम नहीं होती थीं, वो तमाशा होती थीं, जुनून होता था, और कभी-कभी खतरा भी।
बाईस फरवरी की रात, मलिक मेंशन फिर से रोशनी में नहाया हुआ था। शहर के चुनिंदा लोग, नामी चेहरे, और कुछ खास मेहमान उस रात के गवाह बनने वाले थे। मगर इस बार मामला कुछ अलग था। इस बार मलिक कुछ ऐसा करने जा रहा था, जिसे देखकर लोगों के होश उड़ जाना तय था।
एक विशाल काँच का टब। दो फीट लंबा, दो फीट चौड़ा, और सात फीट ऊँचा।
एक ऐसा कैदखाना, जहाँ से निकलना नामुमकिन लगता था।
मलिक उस टब के अंदर बंद होने वाला था, और फिर टब में पानी भरा जाना था। आठ मिनट में पूरा टब पानी से लबालब भर जाता, लेकिन मलिक का दावा था कि वह पंद्रह मिनट बाद जिंदा बाहर निकलेगा।
लोग हँस रहे थे।
कुछ हैरान थे।
और कुछ, खामोशी से इंतज़ार कर रहे थे।
क्योंकि हर किसी को यकीन था, यह खेल नहीं, मौत से सामना है।
या फिर मजाक है।
लेकिन उस रात सिर्फ मलिक ही मौत से नहीं खेल रहा था। भीड़ में एक ऐसा चेहरा भी मौजूद था, जो मुस्कुरा तो रहा था, मगर उसकी आँखों में कुछ और ही चल रहा था। वह पहले ही तय कर चुका था कि यह स्टंट, मलिक का आखिरी स्टंट होगा। उसने एक ऐसा जाल बिछाया था – इतना महीन, इतना खतरनाक – कि किसी को उसकी भनक तक नहीं लगी।
और फिर खेल शुरू हुआ।
टब बंद हुआ। पानी भरना शुरू हुआ। घड़ी की सुइयाँ दौड़ने लगीं।
पहले एक मिनट। फिर तीन। फिर पाँच।
मेहमानों का हंसना धीरे-धीरे सन्नाटे में बदलने लगा।
मलिक अंदर था, संघर्ष करता हुआ, जिसे मजाक मानकर बाहर मौजूद दर्जन भर लोग उसे मरते हुए देख रहे थे। उनमें से एक पत्रकार वंश वशिष्ट भी था। उसके लिए यह सिर्फ एक पार्टी नहीं थी। यह उसके जीवन का पहला ऐसा केस बनने जा रहा था, जहाँ उसने कत्ल को अपनी आँखों के सामने घटित होते देखा।
मगर सबसे डरावनी बात ये थी कि वह सिर्फ देख सका, कुछ कर नहीं पाया। और जब तक लोगों को समझ आया कि यह एक खेल नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
स्वराज मलिक अब सिर्फ एक नाम रह गया था। और वंश वशिष्ट के सामने खड़ा था, एक ऐसा रहस्य, जिसकी हर परत में छिपा था धोखा, और हर जवाब के पीछे एक नया सवाल। क्योंकि यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी। यह एक परफेक्ट मर्डर था।
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Original price was: ₹99.00.₹79.00Current price is: ₹79.00.Buy nowSubscribe nowRead a sample
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