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By: Santosh Pathak

पाओलोन सुतंगा की मौत कोई आम मौत नहीं थी। उसकी हत्या गर्दन में सुआ घोंपकर की गयी थी और लाश भीतर से बंद दरवाजे के पीछे पड़ी थी। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि कातिल हत्या के बाद वैसा करने में कैसे कामयाब हो गया, क्योंकि जो दिखाई दे रहा था वह मुमकिन नहीं था।
देखते ही देखते पंद्रह दिन गुजर गये। बंद कमरे की मिस्ट्री पुलिस के लिए मिस्ट्री ही बनी रही, इसीलिए कातिल भी कानून की पकड़ से बचा रहा। तब पुलिस से नामउम्मीद होकर मरने वाले की विधवा मंजरी सुतंगा ‘द वॉचमैन’ डिटेक्टिव एजेंसी पहुंची, जिसके बाद पार्थ सान्याल हत्यारे का पता लगाने के लिए अपनी टीम के साथ मैदान में कूद पड़ा।
फिर शुरू हुआ एक ऐसा खतरनाक खेल जिसमे खुद पार्थ कई बार मरते मरते बचा। कातिल का पता लगाने के लिए उसे दिल्ली से मेघालय तक का सफर करना पड़ा, और वह सफर आसान तो नहीं ही था, क्योंकि मरने वाले की बीती जिंदगी में कई गहरे राज़ दफन थे, और वह राज़ ही पार्थ के लिए सबसे बड़ी रुकावट साबित हो रहे थे।

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