परिवार से अलग तनहा जीवन जी रही मानसी अग्रवाल एक रोज़ अपने फ्लैट में मरी पायी गयी। प्रथम दृष्ट्या आत्महत्या का मामला जान पड़ता था, क्योकि पुलिस को दरवाजा भीतर से बंद मिला था। ऐसी किसी स्टोरी में बंश वशिष्ठ को कोई इंट्रेस्ट नहीं होना चाहिए था, मगर इंटरेस्ट तब बन गया, जब घटनास्थल से एक ऐसी न्यूज़ कटिंग बरामद हुई, जिसमे किसी युवती की एक्सीडेंटल डेथ की खबर छपी थी। अब वंश के सामने तीन बड़े सवाल थे। नंबर एक, मानसी उस कटिंग को संभाले क्यों बैठी थी? नंबर दो, क्या वह एक्सीडेंट में जान गवाने वाली लड़की को जानती थी? नंबर तीन, क्या उस एक्सीडेंट में कोई भेद था ?
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