नीलेश तिवारी एक लेखक था! ऐसा लेखक जो अपने लेखन से मिलने वाली वाहवाही का लुत्फ नहीं उठा सका। उसकी पहली रचना ‘आवारा लेखक‘ प्रकाशित क्या हुई, मानो उसकी जिंदगी को ग्रहण लग गया। अगले ही रोज वो अपने फ्लैट के बॉथरूम में मरा हुआ पाया गया। क्या पुलिस, क्या मीडिया! सभी उसकी मौत को महज दुर्घटना करार देकर खामोश बैठ गये थे। तभी नेशनल डेली ‘खबरदार‘ के नाम से आई एक चिट्ठी ने हाहाकार मचाकर रख दिया। फिर एक के बाद एक हत्याओं का जो सिलसिला शुरू हुआ वो तो जैसे रूकने का नाम ही नहीं ले रहा था। पुलिस हैरान थी, परेशान थी! कातिल को पकड़ना तो दूर रहा, पुलिस हत्यारे का मकसद तक नहीं तलाश कर पा रही थी….!
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