‘एनडीएसए’ एक ऐसी जांच एजेंसी जहां अपराध होने से पहले ही उसकी भविष्यवाणी कर दी जाती है। एक गुप्त सरकारी प्रणाली ‘संविधान ए.आई.’ जो तय करती है कि कौन जोखिम है, कौन संदिग्ध है, और कौन देशद्रोही है। फिर एक वक्त वह भी आता है जब नागरिकों से उनका अधिकार, उनका सोशल स्टेटस, उनकी आजादी छीनी जाने लगती है। वह भी सिर्फ एक स्कोर के आधार पर।
ऐसे में एक्स आईपीएस आर्यन खन्ना को शक होता है कि मशीन गलती नहीं कर रही, उसे गलती करने के लिए प्रोग्राम किया जा रहा है। आगे जैसे-जैसे वह रहस्य की परतें हटाता जाता है, वैसे वैसे एनडीएसए की असलियत बाहर आने लगती है, फिर सामने आता है एक दिल दहला देने वाला सच।
जहां संभावना को प्रमाण बनाकर न्याय का गला घोंटा जा रहा था। नेशनल डिजिटल सिक्योरिटी एक्ट (एनडीएसए) के तहत अपने उल्लू सीधे किये जा रहे थे। नीचे से लेकर ऊपर तक हर कोई डरा हुआ था। ऐसे में अहम सवाल ये था कि देश का संविधान अदालत में बचेगा, या एनडीएसए के सर्वर रूम में हार जाएगा? क्योंकि सच यही था कि यह लड़ाई बंदूकों से नहीं, एल्गोरिद्म से लड़ी जा रही थी।
लेखक संतोष पाठक की कलम से निकला एक ऐसा राजनीतिक सस्पेन्स थ्रिलर जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता लोकतंत्र को चुनौती देती है….
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