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By: Santosh Pathak

बारह अक्टूबर की रात दिल्ली के भैरव मार्ग पर एक लाश बरामद हुई।
मामूली कपड़ों में लिपटी एक ऐसी लाश जिसकी जेबें खाली थीं, इसलिए कहना मुश्किल था कि मरने वाला कौन था।
देखा जाये तो वह कोई बड़ी बात नहीं थी क्योंकि पुलिस को आये दिन ऐसे हालात से दो चार होना ही पड़ता था। मगर दो वजहों से कत्ल का वह मामला अचानक ही उलझ सा गया।
नंबर एक उसकी हथेली पर होम मिनिस्टर के पीए अर्जुन त्यागी का मोबाईल नंबर लिखा था। नंबर दो हत्यारों ने जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया था वह शिक्षा मंत्रालय के नाम पर रजिस्टर थी। वह सच बाहर आते ही पुलिस के होश उड़ गये, एक मामूली सी दिखने वाली वारदात अचानक ही बड़ी राजनैतिक साजिश नजर आने लगी।
सच क्या था उसका पता लगाने के लिए पुलिस से पहले ‘खबरदार‘ का चीफ रिपोर्टर आशीष गौतम दिल्ली से मनाली जा पहुंचा और वहां एक ऐसे चक्रव्यूह में जा फंसा जहां कदम कदम पर मौत बिछी थी। जहां दुश्मन उसकी लाश गिराने के लिए बेताब था। फिर एक वक्त वह भी आया जब खुद आशीष को इस बात का यकीन आ गया कि मनाली का वह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बनकर रह जाने वाला था।

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