मॉडल वर्तिका सिंह एक ऐसे दुश्चक्र में फंसी हुई थी, जिससे निकल पाना करीब करीब असंभव था। वह शादी करने जा रही थी जिसकी मुखालफत में खड़ा था राजधानी का कुख्यात अपराधी शशांक सेठी। लड़की को उसकी चेतावनी थी कि शादी के बारे में सोचने से पहले वह अपने और अपने बेटर हॉफ के लिए कफन का इंतजाम कर ले। ऐसे किसी मामले में मेरे जैसा पीडी भला कर ही क्या सकता था। मैं क्या उसे सेठी के जलाल से बचा सकता था? उल्टा कोशिश भी करता तो वर्तिका से कहीं पहले वह मेरी लाश गिरा देता, मगर तीन वजहों से केस मैंने फिर भी ले लिया। नंबर एक, उसे मेरे पास भेजने वाली एक रेग्युलर क्लाइंट थी जिसे ना कहना मुझे गंवारा नहीं हुआ। नंबर दो, आजकल मेरे पास करने को कुछ भी नहीं था। नंबर तीन, लेकिन सबसे अहम वजह यह रही कि मामले को ढंग से समझे बिना ही लड़की के सामने एक बड़ा बोल बोल बैठा था, ये कि मैं डरकर पीछे हटने वालों में से नहीं था। शायद इसी को अपनी कब्र खुद खोदना कहते होंगे।

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