शहर से छह लड़कियों को अगवा कर लिया गया, जिनका पुलिस को खोजे भी कोई सुराग नहीं मिल रहा था। फिर छह में से एक एमपी तेजपाल की पोती सुहासिनी वापिस घर लौट आई। हैरानी की बात ये थी कि लौटते के साथ ही एमपी ने उसे कनाडा भेज दिया, और पुलिस को उसकी घर वापसी की भनक तक नहीं लगने दी।
इंस्पेक्टर सतपाल सिंह और विशाल सक्सेना हर तरफ उन लड़कियों की तलाश में मारे मारे फिर रहे थे, एक से बढ़कर एक हैरतअंगेज वाकयात से उन्हें दो चार होना पड़ रहा था, और इससे पहले कि दोनों अगवा की गयी लड़कियों तक पहुंच पाते, शहर के अलग अलग हिस्सों से छह और लड़कियों का अपहरण कर लिया गया।
अब दोनों को तलाश थी ग्यारह लड़कियों की, और अपराधी था कि उनकी लाश बिछाने की कोशिश में जी जान से जुटा हुआ था। ऐसे में कभी न कभी तो उनकी जान आफत में पड़नी ही थी, मगर जिस तरह से उन्हें मौत के आगोश में धकेला गया उसकी तो उन दोनों ने कल्पना तक नहीं की होगी।


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