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By: Santosh Pathak

साहिबे जायदाद शमशेर सिंह राणा अधेड़ावस्था के पार पहुंच चुका निहायत ही बदनीयत, ऐय्याश और मौकापरस्त शख्स था। अपनी जिस पुश्तैनी हवेली पर वह अकेला किसी प्रेत की तरह काबिज था, उसे शापित बताया जाता था। दूर दूर तक प्रचलित था कि हवेली में शाम ढलते ही मौत के साये विचरने लगते थे। रात के सन्नाटे में अजीब और दिल दहला देने वाली आवाजें सुनाई देती थीं। ऐसी भयानक और डरावनी जगह पर रहने वाले शख्स को एक रोज भटकती हुई रूहें अगर साक्षात दिखाई देने लगीं तो क्या बड़ी बात थी।

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Based on 2 reviews
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2 reviews for Chhalawa

  1. Jay –

  2. Sumit Kumar –

    Great suspense.. fast thriller

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