लाश बदरपुर के इलाके में एक नवनिर्मित इमारत के भीतर बरामद हुई थी। डेडबॉडी को पंखे के लिए लगाये गये हुक के साथ मोटी रस्सी बांधकर लटका दिया गया था। उसके दोनों हाथ और पैर पीठ की तरफ इकट्ठे कर के बांधे गये थे, उस स्थिति में मृतक के शरीर का सामने का हिस्सा फर्श की तरफ था, जबकि पीठ छत की तरफ। करीब करीब धनुरासन जैसा दृश्य दिखाई दे रहा था।
नीचे फर्श पर लोहे के एक तगाड़ में राख और कुछ अधजली लकड़ियों के टुकड़े पड़े थे। तगाड़ मरने वाले की गर्दन के ठीक नीचे रखा था, और दोनों के बीच का फासला दो फीट से ज्यादा का नहीं था। देखकर लग यही रहा था कि हत्यारे ने उसे जलती आग के ऊपर टांग दिया था, क्योंकि चेहरा, गर्दन और छाती जली दिखाई दे रही थी।
तगाड़ के चारों तरफ फर्श पर रोली से एक घेरा बनाया गया था, जिनपर चावल के दाने बिखरे हुए थे। पास में ही एक मिट्टी का कलश रखा था, जिसमें करीब आधा इंच ब्यास वाला, सात-आठ इंच लंबा हड्डी का एक टुकड़ा मौजूद था।
दाईं तरफ लाल रंग के कपड़े पर एक खुली हुई किताब रखी थी, जिसपर गुलाब की पंखुड़ियां पड़ी थीं। उसके एकदम आगे फर्श पर रोली से ही 1,2,3,4,5 लिखकर ‘5‘ पर काले रंग से एक क्रॉस मार दिया गया था, और वह काम किसी जली हुई लकड़ी या राख के जरिये किया गया था, कम से कम रोली या किसी मार्कर वगैरह का इस्तेमाल तो नहीं ही हुआ था।
अब ऐसे अजीबो गरीब मामले को जिसमें तंत्र-मंत्र का तड़का लगा दिखाई दे रहा हो, एंटी क्राइम ब्यूरो के इंस्पेक्टर विराट राणा के अलावा भला कौन सॉल्व कर सकता था?

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