Skip to content
Sale!
By: Santosh Pathak

एडवोकेट आंनद सलूजा पांच दिनों बाद पटना से दिल्ली वापिस लौटा तो उसकी दुनिया बदल चुकी थी, बल्कि उजड़ चुकी थी। ये जानकर तो उसके पैरों तले जमीन ही खिसक गयी कि उसकी लाश का पोस्टमॉर्टम तक कराया जा चुका था। प्रत्यक्षतः उस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं था क्योंकि मेरी क्लाइंट अंतरा नाम की एक महिला थी जिसका पति शरद कपूर दस दिनों से गायब था, ना कि एडवोकेट आनंद सलूजा। मगर जल्दी ही मुझे दोनों मामले आपस में कनैक्टेड दिखाई देने लगे क्योंकि शरद कपूर और आनंद सलूजा ना सिर्फ एक ही पेशे में थे, बल्कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती भी थी।

Read instantly in your browser or the app. Nothing to download.

Original price was: ₹99.00.Current price is: ₹79.00.Buy nowSubscribe now

A subscription covers this book and everything else in the library.

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “The Burned Identity”

Your email address will not be published. Required fields are marked *