एक कत्ल दो सस्पेक्ट और दोनों ही एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे कि हत्या दूसरे ने की है। कौन झूठ बोल रहा था और कौन सच, उसका पता लगाना आसान काम नहीं था। ना ही पुलिस उन दोनों को एक साथ कत्ल के इल्जाम में गिरफ्तार कर सकती थी, क्योंकि उनमें से एक का दर्जा आई विटनेस का था। नतीजा ये हुआ कि पूरा मामला मकड़ी के जाले की तरह निरंतर उलझता चला गया। पुलिस के सामने सबसे बड़ी अड़चन ये कि दोनों ही सस्पेक्ट्स हाई सोसाईटी के जाने पहचाने चेहरे थे, यानि ऐसे लोग जिनपर चाहकर भी जोर आजमाईश नहीं की जा सकती थी, उनके हलक में हाथ डालकर अपने मतलब की जानकारी नहीं उगलवाई जा सकती थी। ऐसे में कातिल कौन है? उस बात का पता लगा पाना आसान काम तो हरगिज भी नहीं था।

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