नमस्कार मित्रो,
रहस्य और रोमांच की दुनिया में आपका स्वागत है।
आप सभी सोच रहे होंगे कि अचानक मुझे ये क्या सूझा जो किंडल छोड़ दिया। वहां किताबें डालनी बंद कर दीं, बैक टू बैक दो नई किताबें आईं और किंडल पर नहीं पहुंचीं, जबकि मेरे 90 फीसदी पाठक किंडल पर ही मुझे पढ़ते हैं, बाकी पेपरबैक के पाठक हैं, और उनमें से भी अधिकतर अमेजन से किताबें खरीदते हैं।
दूसरा प्रश्न आपके मन में ये होगा कि जब किंडल पर सब बढ़िया चल रहा था तो मैंने खुद को थ्रिल वर्ल्ड के रीडिंग एप्प पर क्यों समेट लिया? ये कोई समझदारी भरा फैसला तो नहीं ही कहा जा सकता था।
इसलिए नहीं क्योंकि किंडल पर रोज नये पाठक जुड़ते रहते हैं, जबकि थ्रिल वर्ल्ड के एप्प पर तमाम रेग्युलर पाठकों को भी ला पाना आसान नहीं होगा। कुछ तो यकीनन छूट जायेंगे, जिसके कई कारण हो सकते हैं। जैसे कोई अपने मोबाइल में ऐसा एप्प इंस्टाल नहीं करना चाहता जो प्ले स्टोर पर नहीं है। आईफोन इस्तेमाल करने वाले पाठकों के लिए हमारे पास आईओएस नहीं है। विदेशी पाठकों के लिए हमारे पास अभी इंटरनेशनल पेमेंट मैथड एक्टिव नहीं है।
मतलब समस्या तो है, और समस्या ऐसी जो लेखक को बड़ा फाइनेंशियल लॉस करायेगी।
एप्प लांच हुए 8-9 दिन हो चुके हैं, और अभी कुल जमा तेरह सौ के करीब पाठकों ने थ्रिल वर्ल्ड को अपनाया है। बेशक किसी नये एप्प के लिए ये शुरुआत उत्साहजनक है और सबसे अच्छी बात ये है कि संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन इसे किंडल के 70-80 परसेंट तक पहुंचने में भी छह महीने तो लग ही जायेंगे।
उसका नुकसान देखिये, अगर ये दोनों किताबें किंडल पर रिलीज हुई होतीं तो अब तक कम से कम 4000 से 5000 पाठक पढ़ चुके होते।
मतलब किंडल से दूरी बनाकर मैंने बस आप पाठकों के सिर पर एक नया खर्चा नहीं डाला है, खुद का बड़ा नुकसान भी करवाया है। अब सवाल ये है कि अगर ये नुकसान का सौदा है तो मैं कर क्यों रहा हूं, किसी ने मेरी कनपटी पर गन तो नहीं सटा रखी है।
सटा रखी है।
गोली भी कई बार चल चुकी है।
जिसका बड़ा नुकसान ये था कि मैंने दो महीने लेखन से खुद को दूर कर लिया।
और उस गन का नाम था किताब का सस्पेंस जो पहले ही दिन ओपन कर दिया जाता था। बाकायदा लिखा जाता था रिव्यु में कि फलां किताब का कातिल फलां शख्स है।
वो एकदम ऐसा ही था जैसे आप एक नई नकोर कार खरीदकर लायें और शोरूम से बाहर निकलते ही उसे कोई जोर से टक्कर मार दे।
अंदाजा लगाइये तब आपको कैसा फील होगा।
मेरा उससे कहीं ज्यादा बुरा हाल होता था, क्योंकि मैं एक लेखक हूं। कार का डेंट सर्विस सेंटर वाले ठीक कर देंगे, इंश्योरेंस कंपनी उस खर्चे की भरपाई भी कर देगी। लेकिन किताब को सस्पेंस ओपन होने की सूरत में जो डेंट लगता था उसकी रिकवरी असंभव थी।
यही वजह रही कि आप पाठकों से मैंने शिकायत की कि आप किताब को रिव्यू नहीं करते। इसलिए क्योंकि किताब पर मेरे हजारों पाठकों में से 500 भी अपनी राय दे देते तो सस्पेंस ओपन करने वाला रिव्यु बड़े आराम से उसके भीतर छिप जाता।
बहरहाल, वो सिलसिला चल निकला। हर किताब का सस्पेंस ओपन किया जाता, मैं किंडल को मेल करता, 15-20 रोज बाद वो रिव्यु हटा दिया जाता, या नहीं भी हटाया जाता। जैसे कि फाइनल डिसीजन का एक रिव्यु मेरी लाख कोशिशों के बावजूद नहीं हटा, आप जाकर देख सकते हैं।
मगर जो हटा दिये गये वो भी 20 दिन बाद हटे और तब तक किताब का बेड़ागर्क हो चुका होता था।
जरा अंदाजा लगाकर देखिये कि तब लेखक के दिल पर क्या गुजरती होगी।
मगर क्या किंडल को उससे फर्क पड़ता था? बिल्कुल भी नहीं।
लेकिन मेरी किताब मेरे लिए मेरे बच्चे की तरह होती हैं। मैं बुरी तरह परेशान, हताश, चिड़चिड़ाया हुआ रहने लगा और लेखन से निरंतर मन उचाट होता चला गया।
लिहाजा मैंने लिखना छोड़ दिया।
मगर दो महीने बीतते-बीतते भीतर की बेचैनी बढ़ने लगी।
लिखने को प्रेरित करने लगी।
और उसमें एक बहुत बड़ा हाथ, बल्कि 90 फीसदी तक दोबारा लेखन शुरू करने की वजह आप बने। आपने मेरा हौसला बढ़ाया, मुझे लगातार लिखते रहने के लिए प्रेरित किया, तरह-तरह के उदाहरण देकर आपने मुझे ये समझाया कि मुझे हार नहीं माननी चाहिए।
आगे मेरे पास दो रास्ते थे।
या तो मैं लिखना छोड़ देता, या किसी नये प्लेटफॉर्म पर ट्राई करता।
मैंने दूसरा रास्ता अपनाया।
आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है, तो समझ लीजिए थ्रिल वर्ल्ड का रीडिंग ऐप्प वही आविष्कार है जो आवश्यकता से पैदा हुआ।
उम्मीद है अब असल समस्यायें आपकी समझ में आ गयी होंगी।
अभी एंड्रॉयड यूजर के लिए एप्प उपलब्ध है, आगे आईओएस के लिए भी कोई न कोई इंतजाम जरूर किया जायेगा।
ऐप्प को प्ले स्टोर पर न डालने की वजह ये है कि तब मजबूरन हमें सब्सक्रिप्शन का प्राइस बढ़ाना पड़ जायेगा, क्योंकि ट्रांजैक्शन पर गूगल 15-20 परसेंट चार्ज करता है। जबकि हमारी कोशिश आप पर कम से कम भार डालने की है।
तो मित्रों सहयोग और प्रेम बनाये रखें।
थ्रिल वर्ल्ड पर आपका स्वागत है।
आएं और नई किताब पढ़ें।
और बतायें कि इस बार पनौती और सतपाल की जोड़ी आपको कैसी लगी।
सादर
संतोष पाठक
