चौदह अक्टूबर की सुबह दिल्ली से सटे फरीदाबाद के इलाके में एक लाश बरामद हुई। ऐसी लाश जिसकी पहचान छिपाने के लिए मरने वाले के चेहरे को पत्थर से कुचल दिया गया था। पुलिस के लिए वह आये दिन घटित होने वाले अपराधों में से बस एक नया अपराध भर था, जो इंस्पेक्टर सतपाल सिंह के लिए जी का जंजाल इसलिए बन गया क्योंकि विशाल सक्सेना उर्फ पनौती की टांग पहले से उसमें घुसी पड़ी थी। फिर तो ऐसे ऐसे वाकयात सामने आने शुरू हुए कि दोनों पनाह मांग गये। कातिल तक पहुंच पाना तो दूर की बात थी उनके लिए अपनी जान बचाना मुश्किल हो गया। ऐसे में सच की तह तक पहुंच पाना आसान काम नहीं था मगर पनौती को पीछे हटना मंजूर नहीं था।

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