दीप्ति बजाज पर आरोप था कि चौदह फरवरी की रात उसने अपने हस्बैंड पर कत्ल के इरादे से गोली चलाई थी, जो निशाना चूक जाने के कारण उसके बाजू में लगी, और वह मरने से बाल बाल बच गया था।
गोली चलाने की बात दीप्ति को कबूल थी, मगर ये मानकर राजी नहीं थी कि उसने जो किया जानबूझकर किया था, अपने हस्बैंड का कत्ल करने के उद्देश्य से किया था।
नियर मर्डर का केस उसपर फिर भी बना, मगर कोई सजा नहीं हुई क्योंकि दीप्ति के वकील ने अदालत में उसे पागल साबित कर दिखाया। लिहाजा जेल जाने की बजाये वह देहरादून मेंटल हॉस्पिटल पहुंच गयी।
मगर उसे न तो जेल की काल कोठरी कबूल थी, ना ही पागलखाना, इसलिए उसने मामले की खबर पार्थ सान्याल को कर दी, जो उससे मिलने मेंटल हॉस्पिटल पहुंचा तो हंगामा खड़ा हो गया। ऐसा हंगामा जिसके कारण पुलिस ने उसे कत्ल का आरोपी बना दिया।
फिर क्या हुआ?
जानने के लिए पढ़ें…..
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