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By: Santosh Pathak

इंटरनेशनल हॉस्पिटल ऐंड हॉर्ट इंस्टीट्यूट की लिफ्ट में एक महीने के भीतर तीन लाशें बरामद होना कोई इत्तेफाक नहीं हो सकता था। मगर पुलिस के सामने मजबूरी ये थी कि जान गंवाने वाले तीनों लोग अपनी अपनी बीमारी के शिकार बने थे। कोई कॉर्डियक अरेस्ट से अपनी जान गंवा बैठा, तो कोई ब्रेन हैमरेज से। वो तो जैसे बस मरने के लिए ही लिफ्ट के अंदर सवार हुए थे।
फिर अचानक ही वह अस्पताल सुर्खियों में आ गया। तब जब किसी ने उसे बम से उड़ा देने की धमकी जारी कर दी। पुलिस को लगता था वह महज धमकी थी। हॉस्पिटल प्रशासन उसे अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश बता रहा था। जबकि आशीष गौतम की निगाहों में वह एक ऐसी कोशिश थी जिससे हत्यारा अपनी तरफ से ध्यान भटकाना चाहता था।
मगर रिस्क लेने को तो कोई तैयार नहीं था, लिहाजा आनन-फानन में मरीजों को वहां से शिफ्ट किया जाने लगा और पूरे हॉस्पिटल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। यूं कि अब वहां कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था।
राजधानी हाई अलर्ट पर थी, पुलिस अधिकारी बौखलाये हुए थे, और हत्यारा कहीं दूर बैठा अपने उस करतब पर ठहाके लगा रहा था। फिर एक ऐसा धमाका हुआ जिसने हर किसी को हैरान कर के रख दिया। और उसे करने वाला हत्यारा नहीं बल्कि ‘खबरदार‘ का चीफ रिपोर्टर आशीष गौतम था।

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