Skip to content
Sale!
By: Santosh Pathak

काशीनाथ जायसवाल अपने गुनाह बख्शवाने की गरज से एक ऐसी औरत से मिलने दिल्ली जा रहा था, जिसके साथ उसका रिश्ता पांच साल पहले पूरी तरह टूट चुका था। जिसे उसने अपने ही हाथों बड़े ही क्रूरता पूर्ण ढंग से खत्म कर दिया था। मगर ये तो उसने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि अपने कुकर्मों का प्रायश्चित करने की खातिर वह जिस सफर पर निकला था, वह उसके जीवन का आखिरी और अधूरा सफर बनकर रह जायेगा। हत्यारे ने चलती ट्रेन में उसे मार गिराया और किसी को कानो कान भनक तक नहीं लगने पाई। पुलिस ये सोचकर भी हैरान हो रही थी कि 60-70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन में बैठे शख्स पर बाहर खड़ा कोई शूटर उतना सटीक निशाना लगाने में कैसे कामयाब हो गया? मगर सवाल और भी थे, जिनका जवाब तलाशना आसान नहीं था, इसलिए नहीं था क्योंकि देखते ही देखते मर्डर सस्पेक्ट्स की संख्या बढ़ती चली गयी।

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Murder In Apoorva Express”

Your email address will not be published. Required fields are marked *