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भूपेंद्र जैन एक बड़ा नाम था। रुतबा और रईसी दोनों उसे विरासत में हासिल हुई थी। मगर था हद दर्जे का गुस्सैल और खब्ती इंसान, जो घर की बहुओं पर तरह तरह की पाबंदियाँ लगाये बैठा था। उसकी पुत्रवधुएँ क्या पहनेंगी और क्या नहीं पहनेंगी, उसका फैसला भी उसके बेटे नहीं बल्कि वह खुद किया करता था।
बीमारियाँ उसके शरीर में स्थाई ठिकाना बना चुकी थीं, या यूँ कह लें कि वह महज अपनी दौलत के बूते पर जी रहा था। ऐसी जिंदगी जिसमें कभी भी उसकी चल चल हो जाना तय था। कायदे से ऐसे इंसान की मौत पर सवाल नहीं उठने चाहिए थे, क्योंकि मौत की वजह कॉर्डियक अरेस्ट बताई जा रही थी।
लेकिन सवाल तो उठे, इसलिए उठे क्योंकि उसकी मौत कोई आम मौत नहीं थी। वह बंद कमरे में मरा था, पेट बुरी तरह फटा हुआ था और शरीर के वाईटल ऑर्गन्स चिंदी चिंदी होकर यूँ बिखरे पड़े थे, जैसे किसी ने बारूद लगाकर उड़ा दिया हो।
अब इंवेस्टिगेट करने के लिए तीन सवाल थे। पहला, अगर उसकी मौत कॉर्डियक अरेस्ट से हुई थी, तो पेट फटा हुआ क्यों पाया गया? दूसरा, अगर कत्ल किया गया था तो हत्यारा कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करने में कैसे कामयाब हो गया? तीसरा, उसकी जान ली तो आखिर ली किसने?
एक ऐसा केस जिसमें पुलिस और फॉरेंसिक दोनों लगभग हार मान चुके थे। और जब किसी की समझ में यही नहीं आ रहा था कि मरने वाले के पेट में उतना भयानक विस्फोट कैसे हुआ, तो कातिल तक पहुँच पाना भला कैसे मुमकिन हो पाता।
फिर क्या हुआ?
क्या भूपेंद्र जैन की रहस्मयी मौत पर पड़ा पर्दा कभी उठ पाया? या वह मामला हमेशा हमेशा के लिए पुलिस के अनसुलझे केसों की फाईल में दफ्न होकर रह गया?
जानने के लिए पढ़ें लॉक्ड रूम मिस्ट्री ‘द इम्पॉसिबल मर्डर’
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Original price was: ₹99.00.₹79.00Current price is: ₹79.00.Buy nowSubscribe nowRead a sample
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