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शहर में कत्ल दर कत्ल हो रहे थे।
इंस्पेक्टर सतपाल सिंह और पनौती हर तरफ मारे-मारे फिर रहे थे, मगर मामले का कोई सिरा उनकी पकड़ाई में नहीं आ रहा था। हां अब तक इतना जरूर साफ हो चुका था कि इस खूनी खेल में शहर के एक से बढ़कर एक बड़े और रसूखदार लोग जुड़े हुए थे। मगर उनमें से कौन गुनहगार था और कौन बेगुनाह, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं था।
चौदह बेकसूर लोगों का नामो-निशान मिटाने के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलर हायर किये गये थे, जो एक के बाद एक लाशें गिराते जा रहे थे। मगर उन्हें हायर किसने किया था और इन हत्याओं के पीछे अपराधी का असली मकसद क्या था, ये अब भी रहस्य बना हुआ था।
फिर सतपाल और पनौती के हाथ टारगेट लिस्ट की एक नई कॉपी लगी, जिसमें हर एक टारगेट का नाम और पता दर्ज था। लिस्ट में शामिल चौदह लोगों में से अब तक सात की जान जा चुकी थी और बाकी सात को बचाना उन दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका था।
हैरानी की बात ये थी कि जो लोग मारे जा चुके थे और जो अब भी अपराधी के निशाने पर थे, उनमें से किसी को भी इस बात का एहसास तक नहीं था कि वे आखिर क्यों किसी की टारगेट लिस्ट में पहुंच गये थे। फिर जल्दी ही सामने आया एक ऐसा सच जिसने दोनों के रोंगटे खड़े कर दिये।
चौदह लोगों को ही क्यों चुना गया था?
उन्हें मौत के घाट उतारने की सुपारी किसने दी थी?
और इन हत्याओं के पीछे छिपा असली खेल क्या था?
जानने के लिए पढ़ें ‘द टारगेट लिस्ट‘ का फाइनल पार्ट
‘बिहाइंड द किलिंग्स’

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